ढूंढ रही थी खुद को मैं… (Self Discovery Poem in Hindi)
ढूंढ रही थी खुद को मैं …हर अपने में…हर रिश्ते में…हर टूटे हुए सपने में… हर उस जिम्मेदारी के बीच,जिसके नीचे दफ़न पड़ी थी मैं…हर उस झूठी मुस्कान में भी,जो रोज़ जीती थी मैं… उस नन्ही सी जान के मुस्कुराहट में भीजिसमें मेरी पूरी दुनिया बसती है…जिसके लिए मैं हर दिन जीती हूँ… और उन … Read more